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संस्था का ध्येय और उद्देश्य
जीवन की समस्त समस्याओं और कठिनाइयों को आध्यात्मिक दृष्टि से किस प्रकार सुलझाया जा सकता है—इसका विवेकनिष्ठ विचार परिस्थितिनुरूप पाठकों को उपलब्ध कराना। आज भारतीय संस्कृति और धर्म के संदर्भ में घोर विस्मृति और अज्ञान देखने को मिलता है। इस विषय में संस्कृति के यथार्थ स्वरूप को समझाने के कार्य में यह संस्था प्रयत्नशील रहेगी। अत्यंत प्राचीन वैदिक काल से लेकर विज्ञाननिष्ठ वाङ्मय के काल तक मानव जीवन की जड़न-घड़न का विवेक तथा राष्ट्र-निर्माण के संबंध में आदर्श विचार-प्रवाह इस संस्था के माध्यम से समाज तक पहुँचाने के लिए संस्था कटिबद्ध रहेगी। संस्था का कार्य प. पू. बाबामहाराज आर्वीकर के मार्गदर्शनानुसार संचालित होगा, और यह प्रकाशन, कार्यक्रम, प्रदर्शन तथा ध्वनि-चित्रफीति आदि माध्यमों से भी संपन्न किया जाएगा।
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