सांगाति पत्रिका
साहित्य के माध्यम से धर्म, भक्ति और अध्यात्म का सम्यक बोध समाज में विकसित हो तथा भारतीय जीवननिष्ठा घर-घर में स्थापित हो — इसी उद्देश्य से “सांगाति” की संगति आरम्भ की गई। अध्यात्मशास्त्र और धर्मशास्त्र का तात्त्विक विवेचन अनेक प्रज्ञावान व्यक्तियों द्वारा निरंतर किया जाता रहा है, परंतु इन शास्त्रों को मानव जीवन में व्यवहारिक रूप से कैसे उतारा जाए और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को शास्त्रसम्मत आधार पर कैसे सजाया जाए, यह साहित्य के विविध रूपों के माध्यम से व्यक्त करना ही “सांगाति” की प्रेरणा है। तत्त्वज्ञान का आचरण करने वाले मानव घटक को उत्क्रांति के मार्ग पर कैसे आगे बढ़ाया जाए, यह “सांगाति” को विशेष महत्त्वपूर्ण लगता है। विचारोत्तेजक लेख, कथाएँ, कविताएँ तथा विविध प्रकार के स्वतंत्र लेखन — इन सभी के माध्यम से इसी विचारसूत्र को प्रकट करना “सांगाति” की मनीषा है।
स्मृती विशेषांक
(जन्मशताब्दी विशेष)
२०२५ में प्रकाशित


साधक का आरोग्य और दिनचर्या विशेषांक
२०२४ में प्रकाशित

गुरुकृपा विशेषांक
२०२३ में प्रकाशित


सांगाति प्रथम अंक
२०२२ में प्रकाशित
