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पू. बाबामहाराज का पू. गुरुदेव रानडे के साथ दिव्य रिश्ता

पू. बाबा दो बार पू. गुरुदेव रानडे के पास गए थे। पहली भेंट में निंबाळ में पू. बाबा का भगवद्गीता के ग्यारहवें अध्याय—‘विश्वरूप दर्शन’ पर प्रवचन हुआ। इस अवसर पर पू. रानडे ने पू. बाबा से कर्नाटक–महाराष्ट्र की सीमा पर निवास करने का आग्रह किया। इस पर पू. बाबा ने उत्तर दिया—
“जैसी परमेश्वर की इच्छा होगी, वैसा ही होगा। मैं क्या निर्णय करूँ!”
इसके पश्चात पू. बाबा पुनः एक बार निंबाळ में पू. गुरुदेव के पास गए थे। उस समय पू. बाबा ने ‘नवविधा भक्तियोग’ पर प्रवचन किया। आत्मसाक्षात्कारी दो सत्पुरुषों के बीच आध्यात्मिक संवाद हुआ और भक्तियोग पर मार्मिक अनुभूतियों के प्रश्नोत्तर संपन्न हुए। जिन्हें यह सुनने का अवसर प्राप्त हुआ, वे वास्तव में धन्य हो गए।
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